Tuesday, September 13, 2011

दावों की गुत्थियाँ

लूटकर चमन जो चले वो कहते हैं कि अमन ला देंगे,
दावों कि गुत्थियाँ बांध कर दे गए दान में गरीब को !


कहते हैं कि हम उजड़े चमन में फिर से अमन ला देंगे,
पेट की आग लिपटती है सड़क पर लहराती तख्तियों से,


आंसुओं की कीमत क्या होती है वो मलमली क्या जाने
मगर कहते हैं कि हम हर सीने का दर्द फिर मिटा देंगे,


लूटकर चमन जो चले वो कहते हैं कि अमन ला देंगे,


"सतीश गंगवार १२-०९-२०११"

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