Tuesday, September 13, 2011

दो मोमबत्तियां

ठहर जाये कोई सांस चलती हुयी,
दो मोमबत्तियां जरुर जला देना ! 
रूह को उसकी चैन भर आ जाये,
न लाश पर कोई खूंरेज़ हवा देना !
"सतीश गंगवार १३-०९-२०११ "

नियम कानून


कानून बनाने से पहले सोच ए इंसान,
तूने कभी कोई नियम तोडा तो नहीं है!


झांक ले तू खुद की परतों में भी पहले,
तेरी सांसों से कभी कोई जला तो नहीं है!


ईमानदारी के नाम पर दिए जलेगे तब ही,
करनी से कोई गरीब चूल्हा बुझा तो नहीं है!


तेरी जुबान की कीमत होगी मगर परख ले ,
कोई मज़लूम तेरे शब्दों से रोया तो नहीं है !




"सतीश गंगवार १२-०९-२०११"

दावों की गुत्थियाँ

लूटकर चमन जो चले वो कहते हैं कि अमन ला देंगे,
दावों कि गुत्थियाँ बांध कर दे गए दान में गरीब को !


कहते हैं कि हम उजड़े चमन में फिर से अमन ला देंगे,
पेट की आग लिपटती है सड़क पर लहराती तख्तियों से,


आंसुओं की कीमत क्या होती है वो मलमली क्या जाने
मगर कहते हैं कि हम हर सीने का दर्द फिर मिटा देंगे,


लूटकर चमन जो चले वो कहते हैं कि अमन ला देंगे,


"सतीश गंगवार १२-०९-२०११"