उड़ने की चाह
Wednesday, April 18, 2012
सांसों की मेहरबानी
मेरी सांसों की मेहरबानी भी मुझ पर ,
अब तेरी शोख़ मुस्कराहटों से ही होती है,
क्या कहूँ कैसे जीता हूँ हर लम्हा ज़ालिम,
ख़ून में रवानी अब तेरे दीदार से ही होती है,
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सतीश
गंगवार------
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