ठहर जाएँ वो एक तमन्ना बनकर,
रूठ जाएँ कभी यूँ हमराज़ बनकर,
सो जाएँ बस्तियां अँधेरी रातों में,
'चन्द्र' जागते हैं पहरेदार बनकर,
@सतीश गंगवार
रूठ जाएँ कभी यूँ हमराज़ बनकर,
सो जाएँ बस्तियां अँधेरी रातों में,
'चन्द्र' जागते हैं पहरेदार बनकर,
@सतीश गंगवार