हर हद पार कर दी मैंने चाहत में, वो जानते हैं,
फिर भी मेरे दिल के ज़ज्बात वो कब समझेगे,
जिंदगी के हर इम्तिहान में पास होता आया हूँ,
मगर, मोहब्बत में कितने और इम्तिहान देने होगे,
कोई क्या कहेगा इस बात से नहीं डरता हूँ मैं,
इसका भी डर नहीं, कि वो मुझे क्या समझेंगे,
मैं तो डरता हूँ शहीद परवानों की बददुयाओं से,
उनकी बेबफाई पर मेरे प्यार को क्या समझेगे,
छोड़ आया हूँ उनकी गली में, अपनी टूटी हुई साँसों को,
जीता हूँ बिना धडकनों के, इस बात को वो कब समझेगे,
कर आया हूँ अपनी मोहब्बत की किस्से परिंदों के हवाले,
रोये थे वो भी बहुत, मगर मेरी हालत वो कब समझेगे,
सतीश गंगवार
