Friday, July 1, 2011

देखकर प्यासी ज़मीन की बेचेनी, बादल भी रुख बदल लेते हैं, 
मगर वो तो आज भी देखकर हमें, अपना मुंह फेर लेते हैं ....

 (सतीश गंगवार, ३०.०६.२०११)

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