इश्क नहीं होगा, जब तलक काम से,
कुछ नहीं बदलेगा, सिर्फ तेरे नाम से,
कर फ़रियाद तू भले ही, बात बना ले,
तुझे पहचान मिलेगी, सिर्फ काम से,
एक पसीना बहाता है, तपती धूप में,
काम के लिए, खूं भी आता चाम से,
काम से इश्क और उसका तेज देखिये,
भूखी आतें, मगर काम की चाल देखिये,
बदलना है 'चन्द्र', खुद को बदलिए काम से,
नाम का क्या, मुर्दे भी जाते हैं एक नाम से,
(सतीश गंगवार, ०७-०९-१०, समय-०९:४५ पी.एम.)
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