Sunday, April 17, 2011

चिलचिलाती धूप

बादलों को चीरती धूप ने जब चेहरे को जलाया,
हसीं उनकी जुल्फों ने तब,  मुझे जलन से बचाया,

बादल सोचकर चले कि ठंडा करें धरती का कलेजा,
मगर सूरज ने भी फिर  तपिश का परचम लहराया,

दोनों की दुश्मनी ने कई कई बार ज़मीन को रुलाया,
पानी ताकते नवजात पौधों को सूरज ने झुलसाया,


सतीश गंगवार 

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