Thursday, July 21, 2011

मंहगाई का पेट्रोल

बिखरे जो तूफ़ान में, मरे हैं जो विस्फोटों में,
आत्मा की शांति के लिए मोमबती जलती है,


जी जी कर जो हर रोज़ मरते हैं, उनके लिए
सरकार रोज़ मंहगाई का पेट्रोल छिड़कती है,


(सतीश गंगवार, १६-०७-२०११)

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