Sunday, April 8, 2012

पढ़े लिखे


पढ़े लिखे होशियार बहुत होते हैं,
रटे हुए भाषण इनके तैयार होते हैं!

मंच पर कुछ भी बोल सकते हैं ये,
उसके बाद भूलने को तैयार होते हैं!

सारे सिद्धांत, नियम याद रखते हैं,
कभी भी बदलने को तैयार रहते हैं!

जैसे इनके घर के खेती हो, हरवक्त,
छोटों का दम घोटने को तैयार होते हैं!

हम सबसे अच्छे, ये भ्रम रहता इनको,
अपने उपदेश देने को तैयार होते हैं!

छोटी बात लगती, बड़ी हिमालय से,
बड़ी बात को सड़ाने को तैयार होते हैं!

सही सीख और अच्छी शिक्षा देते हैं,
पर खुद उसका उल्टा शोषण करते हैं!

संभल के , इनके चक्कर में न आना,
किसी अनपढ़ से उपदेश ले लेना तुम!

कभी सच कहने कि कोशिस न करना,
शहद से कुचलने को तैयार होते हैं ये !

कभी मास्टर जी ने नहीं पढाया ये सब
फिर कैसे ये पढ़े लिखे तैयार होते हैं..!

(सतीश गंगवार, १७-०३-२०१२)

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