Friday, April 27, 2012

बदरंग

आज कोई क्यूकर बहुत याद आने लगा है, 
मेरी सांसे भी वो यूँ ही क्यों चुराने लगा है ! 
शबाब उसका मेरी नज़रों में बिखरने लगा है,
मैं बदरंग, मगर रंग उसका निखारने लगा है ! 




© सतीश गंगवार  

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