उदास मत हो इस तरह कि मेरा दम निकल जाए,
हर चमन तेरे मुस्कराने का ही इंतज़ार करता है...!
गम नहीं इंतज़ार में कोई खूबसूरत शै निकल जाए,
शमां के जलने का, परवाना यूँ इंतज़ार करता है..!
कोई गम नहीं जिंदगी, शाख से टूटा पत्ता बन जाए,
कली के शबाब में भमरा इस कदर मदहोश रहता है..!
किसी के जाने से कब मेरी आँखों को रोना आ जाए,
दिल अब मेरा रोज़ रोते हुए सोने को तैयार रहता है..!
ख़ुशी के पल का इंतज़ार करते भले ही मौत आ जाए,
'चन्द्र' हरदम अपने कफ़न का सामान साथ रखता है..!
@ सतीश गंगवार
No comments:
Post a Comment