गुज़र गए वो बादल भी जो बरसने थे मेरी जिंदगी में,
आंधियाँ भी रुख नहीं करती हैं अब मेरे गाँव का.....!
दिल ने ना धडकने का इरादा भी कर लिया है अब,
और आंसू भी साथ नहीं देते हैं इन सूखी आँखों का....!
कोई भी रास्ता नहीं जिसमे मैं चला न हूँ इस जहां में,
कदम भी साथ छोड़ने लगे हैं अब मेरी जिंदगी का....!
पलकें भी झपकती नहीं अब इन दीवारों के पिंजरे में,
कसकता है जिन्दा रहना अब हाल है ये जिंदगी का..!
ये जिंदगी भी बड़ी बेअसूल हो गयी, मेरी मोहब्बत में,
'चन्द्र' हम तो साथ देंगें, उनकी टूटती हर सांस का...!
@सतीश गंगवार
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