चल दिल आज समंदर के किनारे चले लहरें बुला रही हैं,
इनका भी साथ देते हैं ये अकेले ही धूप में नहा रही हैं.
तेरा भी अकेलापन छट जायेगा ये सबको गले लगा रही हैं,
भूल जा सब उदासी के क्षण ये तो तुझे ही बुला रही हैं.
उतार दे रंज की धुंध अब खुशियाँ तुझे ही बुला रही हैं.
सूरज की किरणे इनके मचलने की तस्वीर ले रही हैं,
स्वछन्द ख़ुशी से इनकी हर बूंद मोती सी चमक रही है.
तू भी शामिल हों जा, रूह अब तेरी ख़ुशी को तरस रही है.
सराबोर कर ले खुद को, ये ख़ुशी के मोती बना रही हैं,
चल दिल आज समंदर के किनारे चले लहरें बुला रही हैं,
इनका भी साथ देते हैं ये अकेले ही धूप में नहा रही हैं.
तेरा भी अकेलापन छट जायेगा ये सबको गले लगा रही हैं,
तेरा भी अकेलापन छट जायेगा ये सबको गले लगा रही हैं,
भूल जा सब उदासी के क्षण ये तो तुझे ही बुला रही हैं.
उतार दे रंज की धुंध अब खुशियाँ तुझे ही बुला रही हैं.
सूरज की किरणे इनके मचलने की तस्वीर ले रही हैं,
स्वछन्द ख़ुशी से इनकी हर बूंद मोती सी चमक रही है.
तू भी शामिल हों जा, रूह अब तेरी ख़ुशी को तरस रही है.
सराबोर कर ले खुद को, ये ख़ुशी के मोती बना रही हैं,
चल दिल आज समंदर के किनारे चले लहरें बुला रही हैं,
इनका भी साथ देते हैं ये अकेले ही धूप में नहा रही हैं.
तेरा भी अकेलापन छट जायेगा ये सबको गले लगा रही हैं,
भूल जा सब उदासी के क्षण ये तो तुझे ही बुला रही हैं...
** सतीश गंगवार **
** सतीश गंगवार **
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