Sunday, September 5, 2010

खूबियाँ

कल खूबियाँ जो उन्होंने गिनाई, पत्थर भी मचलने लगे!
उनके कदरदान एक ही बार में, अपना उस्ताद कहने लगे!
अलफ़ाज़ मेहरबान हैं उन पर इतने, कि खुद ही सजने लगे
चन्द्र भी आज से और अभी से उन्हें सजदा करने लगे! 
** सतीश गंगवार **

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