पहचान ढूंढ़ रहे हैं, थोथे आईने में,
हम कुछ भी तो नहीं, पोटली हैं चीथड़ों की,
ह्रदय घुट घुट कर स्पंदन करता है,
चिंता नहीं किसी को मानवता की,
हम कुछ भी तो नहीं, पोटली हैं चीथड़ों की ,
ह्रदय की संरचना समान,रक्त तत्व भी,
एक धडकता है प्रेम से, दूसरा लेता है जिंदगी,
अपने ह्रदय को हर कोई आइना बनाता क्यो नहीं,
हम कुछ भी तो नहीं, पोटली हैं चीथड़ों की,
पहचान ढूंढ़ रहे हैं, थोथे आईने में,
सतीश गंगवार
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