ऐ दोस्त अल्फाज़ो का समंदर उमड़ा मेरे जेहन में !
कोई गलत तर्जुमा न किया था तेरी बात का मैंने!
तुझमे तो कुछ खास है तभी तो अपना बनाया मैंने !
कभी न रोका अपने अन्दर उमड़ते समंदर को मैंने !
कभी न रोका अपने अन्दर उमड़ते समंदर को मैंने !
फ़क़त कुछ दोस्तों की स्याही से सीखा है लिखना मैंने!
उनकी ताक़त से बिखरे हुए अलफ़ाज़ सजाना सीखा मैंने!
उनकी ताक़त से बिखरे हुए अलफ़ाज़ सजाना सीखा मैंने!
खुशकिस्मत हूँ कभी किसी पल दोस्ती में न दर्द पाया मैंने!
इसलिए हर पल हर हालात पे कुछ न कुछ लिखा है मैंने!
इसलिए हर पल हर हालात पे कुछ न कुछ लिखा है मैंने!
रोकूंगा न दोस्तों की थमाई हुयी कलम, कसम ली मैंने !
दर्द लिखूं या कुछ और भी मगर हर पल जिया है मैंने !
दर्द लिखूं या कुछ और भी मगर हर पल जिया है मैंने !
तू छोड़कर जायेगा कैसे ऐ मेरे दोस्त ये तो बता मुझे !
तेरे बिना कब समझ पाया हूँ जिंदगी ये तो बता मुझे!
तेरे बिना कब समझ पाया हूँ जिंदगी ये तो बता मुझे!
ऐ दोस्त अल्फाज़ो का समंदर उमड़ा मेरे जेहन में !
कोई गलत तर्जुमा न किया था तेरी बात का मैंने!
** सतीश गंगवार **
कोई गलत तर्जुमा न किया था तेरी बात का मैंने!
** सतीश गंगवार **
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