Sunday, September 5, 2010

दोस्तों की स्याही

ऐ दोस्त अल्फाज़ो का समंदर उमड़ा मेरे जेहन  में !
कोई गलत तर्जुमा न किया था तेरी बात का मैंने!

तुझमे तो कुछ खास है तभी तो अपना बनाया मैंने !
कभी न रोका अपने अन्दर उमड़ते समंदर को मैंने !

फ़क़त कुछ दोस्तों की स्याही से सीखा है लिखना मैंने!
उनकी ताक़त से बिखरे हुए अलफ़ाज़ सजाना सीखा मैंने!

खुशकिस्मत हूँ कभी किसी पल दोस्ती में न दर्द पाया मैंने!
इसलिए हर पल हर हालात पे कुछ न कुछ लिखा है मैंने! 

रोकूंगा न दोस्तों की थमाई हुयी कलम, कसम ली मैंने !
दर्द लिखूं या कुछ और भी मगर हर पल जिया है मैंने !

तू छोड़कर जायेगा कैसे ऐ मेरे दोस्त ये तो बता मुझे !
तेरे बिना कब समझ पाया हूँ जिंदगी ये तो बता मुझे!

ऐ दोस्त अल्फाज़ो का समंदर उमड़ा मेरे जेहन  में !
कोई गलत तर्जुमा न किया था तेरी बात का मैंने!
 ** सतीश गंगवार **

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